
Prashant Kumar
मुझे अपने घर की परिस्थिति मुझे घर तक रहने को सीमित करती है, जिसको मुझे तोड़कर निकलना है। मुझे बहुत असहनीय लगने लगा है।
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मुझे अपने घर की परिस्थिति मुझे घर तक रहने को सीमित करती है, जिसको मुझे तोड़कर निकलना है। मुझे बहुत असहनीय लगने लगा है।
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