Reeta Gautam मेरा बेटा भी ऑनलाइन गेम खेलना चाहता है और मोबाइल न देने पर हिंसक हो जाता है ।
Talking Mirror
रीता जी, आपने लिखा कि मोबाइल न देने पर वह हिंसक हो जाता है, और यहीं सवाल बेटे से ज़्यादा उस पल का है जब आपके हाथ में मोबाइल होता है और सामने उसका गुस्सा। उस पल में फैसला कौन करता है, उसकी हिंसा या आपका देखना। एक बच्चा जिद पर अड़ता है तो मोबाइल पकड़ा देना सबसे आसान रास्ता लगता है, पर हर बार वह रास्ता चुनने से बच्चे को यह सिखता जाता है कि गुस्सा दिखाओ, चीज़ मिल जाएगी। गेम की लत वहाँ से शुरू नहीं होती, वहाँ से सधती है। सवाल यह नहीं कि मोबाइल कैसे रोकें, सवाल यह है कि उसके गुस्से के आगे आप कितनी देर टिक सकती हैं बिना झुके। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















