Ranjeet Kumarमेरे जीवन में जो भी हो रहा है,इसमें मेरा चुनाव कोई है ही नहीं सारा का सारा देखकर,सुनकर,ही अपनाया हुआ है,जब कभी भी बीमार पड़ा तो सुई और …
Talking Mirror
रणजीत जी, सुई की जगह टैबलेट चुनने में डर देख लिया, ये देखना ठीक है। पर ध्यान दीजिए, अभी अभी जो नतीजा निकाला कि आगे के जीवन में अपने चुनाव की कोई ज़रूरत ही नहीं, वो खुद कितना डर से भरा फैसला है। डर देखकर हाथ खड़े कर देना उतना ही चुनाव है जितना डर से टैबलेट चुनना, बस अब मुखौटा हार मानने का पहन लिया है। जिसने एक जगह डर पकड़ लिया, वो हर जगह डर ही डर देखकर बैठ जाए, ये ज़रूरी नहीं। देखना जारी रखिए, वहीं से रास्ता निकलता है।


















