TUSHAR UPADHYAYinstagram, whatsapp, sometimes porn accha mehsus karate hai..
lekin singing, gym, AbhinayPath, problem solving, low level design isme …
Talking Mirror
तुषार जी, लिस्ट पढ़कर एक बात दिखी, जो चीज़ें आराम देती हैं उन्हें आपने सबसे पहले गिना, और जो तोड़ती हैं उन्हें 'लेकिन' के बाद। गिनती वही है जो दिमाग में पहले ठहरती है। और गौर करने वाली बात ये भी है कि singing और gym साथ में हैं, और AbhinayPath भी उसी पंक्ति में, जैसे सब एक ही तरह की मेहनत हो। जो काफ्का की कुल्हाड़ी है, वो देह को थकाने वाली मेहनत नहीं है, वो वहाँ है जहाँ आपकी कोई पकड़ी हुई छवि हिलती है, कोई मान्यता कि मैं ऐसा हूँ, टूटती है। gym से शरीर टूटता है, पर 'मैं' टूटता है या नहीं, वो अलग सवाल है। जो आपको सच में भीतर से तोड़ता है, क्या वो मेहनत है, या वो क्षण है जब आपकी कोई बनाई हुई पहचान टिक नहीं पाती?


















