Ritesh Rathod frमे इसमें गन्दी तरह से फंस गया और इससे मुझे बहुत बड़ा नुकसान हुआ
मे 10th में डेस्ट के साथ बता करना दोस्त ने जाने अनजाने में कंडीशन करद…
Talking Mirror
रितेश जी, दोस्त की एक बात ने भीतर इतनी गहरी जड़ें बना ली कि आज तक कोचिंग न लेने का फैसला उसी डर से हो रहा है, यह देखना ही बड़ी बात है। मगर एक चीज़ ध्यान से देखिए, वह दोस्त तो एक बार बोलकर चला गया था, उसके बाद हर साल, हर बरस, वो बात दोहराने का काम कौन कर रहा था? कंडीशनिंग एक बार लगती है, पर उसे ज़िंदा रखने वाला रोज़ का फैसला अपना ही होता है। जो चूक गया वो अब लौटेगा नहीं, लेकिन आज हेल्थ को टालने का फैसला अभी हो रहा है, इसी पल, और इसी पल में इसे देखने की गुंजाइश भी अभी है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















