NISHA KUMARIbchchi ko kewl screen se dur rkhna pryapt nhi ahi unhe uske bare em shi kja kri dena jruri hai
mere ghr pr mera ek chhota bhai hai oo …
Talking Mirror
निशा जी, आपने खुद लिखा कि भाई ने गेम कम नहीं किया क्योंकि उसे कुछ समझ आया, बल्कि इसलिए किया क्योंकि आपने उसके ऊपर रोज़ 3-4 घंटे की ऑनलाइन क्लास लगा दी। समय भर गया तो गेम का समय घट गया, यह व्यवहार बदला है, दिशा नहीं। गुस्सा, चिड़चिड़ापन, छोटी बात पर भड़क जाना, ये सब वैसे ही मौजूद हैं, बस अब गेम की स्क्रीन की जगह किताब की स्क्रीन ले ली है। जो चीज़ उसे गेम में खींच रही थी, बोरियत हो, अकेलापन हो, या हार का डर, वह जगह अब भी खाली है, बस व्यस्तता से ढक दी गई है। खाली समय भरना और उस खालीपन को समझना, ये दोनों अलग काम हैं। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















