Komalअपने जीवन में सबसे ऊपरी उपभोगों को देखिए। वे क्या हैं? और क्या वे आपकी या दूसरों के शोषण में कोई भूमिका निभा रहे हैं?
प्रोसेसड फ़ूड में …
Talking Mirror
कोमल जी, एक बात ग़ौर करने वाली है। दूध छोड़ने से पहले जो तर्क था वो था, हम तो किसी जीव को हानि नहीं पहुँचा रहे। अब आचार्य जी को सुनने के बाद जो दिखा वो ये कि वही तर्क खुद अधूरा था, सुविधा से गढ़ा हुआ। सवाल ये नहीं कि दूध सही है या ग़लत, सवाल ये है कि कितनी आसानी से मन अपने को निर्दोष घोषित कर देता है, बिना जाँचे। तो अगली बार जब भीतर से आवाज़ आए कि इसमें तो कोई नुकसान नहीं, वहीं थोड़ा और रुककर देखिएगा। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















