
भारत में पवित्र नदियों (जैसे गंगा, यमुना या अन्य जीवनदायिनी नदियां) इसका सबसे प्रमुख उदाहरण हैं, जिन्हें देवी मानकर पूजा जाता है, लेकिन फिर भी उनकी दुर्दशा हो रही है। • चुना गया उदाहरण: गंगा नदी (मां गंगा)। • हमारा स्वार्थ: हमारा स्वार्थ यह है कि हम उनसे अपनी आर्थिक, धार्मिक और दैनिक ज़रूरतें पूरी करते हैं, जैसे सिंचाई, उद्योग, बिजली उत्पादन, और धार्मिक अनुष्ठान (पूजा-पाठ, अस्थि विसर्जन आदि)। • अनदेखी की जाने वाली हानि: अपने इस स्वार्थ को पूरा करने के लिए हम नदियों में औद्योगिक कचरा, सीवेज और प्लास्टिक बहाकर उनके अस्तित्व को संकट में डाल देते हैं। हम इस बात की पूरी तरह अनदेखी कर देते हैं कि इससे जल प्रदूषण बढ़ रहा है, जलीय जीव मर रहे हैं और भविष्य में पीने योग्य स्वच्छ जल का गंभीर संकट पैदा हो रहा है।


















