
Kiran Raikwar
अज्ञान बो भी स्वीकार लेता हे। जिससे उसे झूठी संतुष्टि मिलती हैं। ओर इसी संतुष्टि को बनाए रखने के लिए। उसके साथ चल क्या रहा है। देख नहीं पाता
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अज्ञान बो भी स्वीकार लेता हे। जिससे उसे झूठी संतुष्टि मिलती हैं। ओर इसी संतुष्टि को बनाए रखने के लिए। उसके साथ चल क्या रहा है। देख नहीं पाता
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