Saritaha turant pratikriya kr deti hu,pr ise kaise dekhe ?
Talking Mirror
सरिता जी, यही तो असली अभ्यास है। जैसे उस चित्र में पहला झटका लगता है शब्द पढ़ने का, वैसे ही ज़िंदगी में पहला झटका होता है प्रतिक्रिया का, वो रुक कर सोचने से पहले ही आ जाती है। कोशिश ये नहीं करनी कि प्रतिक्रिया रुक जाए, कोशिश ये करनी है कि प्रतिक्रिया देने के ठीक बाद, एक पल को देखें कि ये प्रतिक्रिया कहाँ से आई, किस पुरानी आदत या मान्यता से। पकड़ना उस पल में नहीं है जब बोल दिया, पकड़ना उस पल में है जब जुबान से निकल चुका है और अब आप उसे देख रही हैं। यही देखना है, बाकी अपने आप स्पष्ट होता जाएगा। आचार्य जी के सत्रों में इस देखने को और गहराई से समझने में मदद मिलेगी।


















