
नमस्ते आचार्य जी 🙏 हमारा समाज आज सिर्फ भोग जानता है जिसमे लड़की को भी सिर्फ भोग की नजर से देखता है, इसलिए उसे बचपन से ही संस्कारित किया जाता है की तुम आकर्षक दीखो, दब के रहो,तुम कमजोर हो, तुमसे नहीं हो पायेगा, ताकि लड़की ख़ुद सिर्फ़ आकर्षक दिखना चुन लेती है, ये सब समाज मैं अंदर तक घुसा हुआ है। यहाँ तक की लड़की के ख़ुद अपनी माता पिता भी उसे ये सब एहसास दिलाते रहता है की तुम लड़की हो। लड़की अपने आस पास भी यही सब होते देखती है अपनी बड़ी बहन और माँ को भी यही सब करती देखती है और उसी रंग 🎨 मैं सज जाती है। बहुत लड़किया को भी ये आसान लगता है और यही सब करती है, क्युकी ख़ुद बेहतर करने मैं संघर्ष करना पड़ता है जिनसे वो ख़ुद को बचा लेती है और सोने की पिंजरा मैं ख़ुद क़ैद हो जाती है। अब आचार्य जी के साथ पाकर बहुत लड़किया आसमान की दीवानी होती दिख रही है। जो सुंदरता का मतलब असली संघर्ष को चुनती है। 🪈धन्यवाद आचार्य जी 🪈


















