
Archana Baghel
भारत में लड़कियों से कहा जाता है कि लड़की हो लड़की की तरह रहा करो झुक के चला करो दौड़ो मत , धूप में मत खेलो काली हो जाओगी, कोई शादी भी नहीं करेगा। हाथ पैर तोड़ लोगी कूदो मत,बड़ी हो गई हो आराम से चला करो खेलकूद बंद करो आदि कमी महिलाओं में नहीं समाज की परंपराओं और मान्यताओ में है अहंकार सबसे पहले स्वयं को शरीर मान लेता है। जब शरीर ही सब कुछ लगने लगता है । तब रंग -रूप स्त्री -पुरुष देखने लगता है। अहंकार ही है जो हमेशा महिला को नियंत्रित करने की सोचता है पहनावा ,चाल ,व्यवहार और जीवन के निर्णय तक को नियंत्रण में रखना चाहता है इसलिए आचार्य जी शरीर को अहंकार की पहली कॉलोनी कहते हैं ।


















