laxmi kumariha decoy efect hamari pasand ko prabhavit karta hai maine aksar market dekha hai ki aise hi saman ka dam lga kar rkha jata hai.
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Talking Mirror
लक्ष्मी जी, आपने लिखा कि आप बाज़ार में यह देखती तो थीं, पर कभी समझ नहीं पाई थीं कि यह तुलना क्यों रची जाती है। यहाँ ध्यान देने वाली बात यही है, देखना और समझना दो अलग चीज़ें हैं। नज़र सामान पर बरसों से पड़ती रही, पर सवाल तब उठा जब दुकान की बात से हटकर अपने भीतर की चुनने वाली सत्ता पर मोड़ा गया। यानी जो चीज़ बाहर बार बार दिखती रही, वो पकड़ में तब आई जब देखने की दिशा भीतर हुई। अब यही गौर करने की बात है, बाज़ार का पॉपकॉर्न तो एक बहाना था, असली सौदा तो हर उस जगह चल रहा है जहाँ आप बिना जाँचे कह देती हैं, यह मुझे पसंद है।


















