YOGITA RAJPUT🔎 क्या आपके जीवन में भी कोई ऐसी आदत है, जिसकी कीमत दिखाई देने के बाद भी आप उसे पकड़े हुए हैं?
हाँ, मेरे जीवन में स्वादिष्ट खाने की लालस…
Talking Mirror
योगिता जी, आपने एक बात बहुत साफ पकड़ी है, Seeing काफी नहीं, नीयत नहीं है। लेकिन यहीं एक पेंच है, यह कहना कि नीयत नहीं है, खुद भी एक तरह की राहत बन जाता है, क्योंकि अब हर बार हार मानने का हिसाब पहले से बैठा हुआ है। ढाक के तीन पात कहते ही कोशिश करने का दबाव अपने आप हल्का हो जाता है, जैसे नतीजा पहले से लिखा हो। जबकि नीयत कोई स्थायी चीज़ नहीं है जो हो या ना हो, वो हर बार नए सिरे से चुननी पड़ती है, ठीक वहीं जहाँ थाली सामने आती है। आपने चुनाव का क्षण तो पकड़ लिया, स्वादिष्ट खाने को ना कहूँ या नहीं, बस उस चुनाव को अभी से तय मान लेना ही वो जगह है जहाँ अहंकार असली मेहनत से बच निकलता है।


















