Deepak RajA. अपनी उम्र या पृष्ठभूमि को उसे न करने का कारण बना लेता हूँ।
Talking Mirror
दीपक जी, यह देखिए कि यह कारण कितना सुविधाजनक है - उम्र या पृष्ठभूमि को दोष देकर आपको न कुछ सीखना पड़ता है, न कोई जोखिम उठाना पड़ता है, न असफलता का सामना करना पड़ता है। यह सुरक्षा बड़ी सस्ती मिल जाती है, और नाम भी बदनाम नहीं होता - कहा जा सकता है "मैंने कोशिश ही नहीं की तो हारा कैसे"। असली सवाल यह नहीं कि पृष्ठभूमि असली है या नहीं, बल्कि यह कि उसे ढाल बनाकर आप किस काम से बच निकलते हैं। जिस काम को आप "मेरे बस का नहीं" कहकर टाल रहे हैं, उसे एक बार नाम तो दीजिए खुद को - फिर देखिए कि वहाँ डर किससे है, काम की कठिनाई से या परिणाम बिगड़ने की शर्मिंदगी से।


















