Garima Chaudhariअब ये समझ आ गया है कि लगभग हर जगह ऐसी स्थितियों, घटनाओं के पीछे अहंकार ही है लेकिन कई बार में खुद को तो हमेशा बल्कि दूसरों को भी व्यक्त…
गरिमा जी, आपने लिखा कि व्यक्ति को व्यक्ति के रूप में देखती हैं, अहंकार के रूप में नहीं, यही वो जगह है जहाँ वो गिद्ध वाली तस्वीर फिर लौट आती है। उस तस्वीर में भी हमें बच्चा दिखा, फ़ोटोग्राफ़र दिखा, पर वो व्यवस्था नहीं दिखी जिसने बच्चे को वहाँ पहुँचाया। वैसे ही जब आप किसी को 'व्यक्ति' के रूप में देखती हैं, नाम, चेहरा, स्वभाव, तो ठीक वही संरचना छुप जाती है जो उस व्यक्ति को वो सब करवा रही है। नाम देखना आसान है, कारण देखना मुश्किल। और यह जो डर लगता है अहंकार शब्द सुनकर, वो इसलिए है क्योंकि सुनते ही बात खुद पर आ जाती है, यह आपने ख़ुद पकड़ा। अब देखने वाली बात सिर्फ़ यह रह जाती है कि दूसरे को देखते वक़्त भी बात कहाँ ले जानी है। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















