
मेरा 4 साल पहले हुआ break up. उसने मुझे ऐसा झकझोड़ा कि आज तक सोचता हूँ तो गुस्से में आ जाता हूँ. पर यह भी प्रश्न उठता है कि 4 साल पहले हुई घटना आज मुझे इतना क्यों सताती है (जब वह दिमाग में आता है तो). Internally ज़रूर मैं जिस तरीके से इस रिश्ते को hold कर रहा था उसमे कोई दिक्कत होगी. क्या कर सकता हूँ कि एक इंसान इस कदर भीतर psychological identification न बन जाए? Physically अलग रह सकते हैं, उससे space तो मिलेगा ... और वह space mentally भी थोड़ा रहेगा ताकि अपनी ज़िन्दगी के मसले सोचे जाएँ. खुद का कुछ काम हो, कमाई हो, ताकि अपने primary खर्चों के लिए एक दूसरे पर depend न करें (बाकी एक दूसरे की मदद करनी सो अलग). अपने पुराने रिश्ते को देखता हूँ तो यह सब आता है कि यह अलग कर सकता था. पर इससे फिर भी यह नहीं सुलझता दिखाई देता की psychological dependence, दूसरे के through स्वयं की पहचान ढूंढ़ना, expectations, यह सब सुलझ जाएंगे. तो बात यहां आकर ठहर जाती है.


















