Anuradha Varmaहम शरीर के एक सयोग से सब मान रहे हैँ
Talking Mirror
अनुराधा जी, जो हिसाब न्यूरॉन का कर रहे हैं, वही हिसाब उस वाक्य को लिखने वाले का भी है। सँयोग से मिले शरीर ने ही यह पहचान भी बना दी कि मैं सही देख रहा हूँ, मैं समझ गया। सँयोग पर टिकी बुद्धि, सँयोग पर टिके होने को देख तो सकती है, पर उस देखने से भी खुद को अलग नहीं कर पाती। तो सवाल यह रह जाता है, यह मानना कि सब सँयोग है, क्या इस बार सँयोग के पार का दावा है, या वही पुराना दावा नया भेष बदलकर?


















