
Suman Jain
नमस्ते जी मेरे जीवनमे इथाका, साक्षी, बोध, है, कुछ कुछ शब्द समझ बैठने लगे है, आचार्य जी ने सही कहा, जिस बंधन मे मैं थी, वहाँ से छूटने लगे है बंधन, ज़ब शुरुआत हो गयी है, तो अंत भी होगा,
Post

नमस्ते जी मेरे जीवनमे इथाका, साक्षी, बोध, है, कुछ कुछ शब्द समझ बैठने लगे है, आचार्य जी ने सही कहा, जिस बंधन मे मैं थी, वहाँ से छूटने लगे है बंधन, ज़ब शुरुआत हो गयी है, तो अंत भी होगा,
No comments yet.