MANJU KRISHNA UPADHYAYयह वीडियो देखकर ही मुझे बहुत ज्यादा डर लगने लगा लग रहा है पता नहीं क्या होने वाला है ऐसा लग रहा है कि पता है पता नहीं नहीं बोलना चाहिए …
मंजू जी, आपने लिखा कि सब पता है, पर यह नहीं पता कि अगला पल क्या लाएगा। ज़रा इस पर ठहरिए, यह डर उस अनजान पल का नहीं है, यह डर नियंत्रण के छूट जाने का है, कि दुनिया आपकी मुट्ठी में नहीं है। और लोग सुनें या न सुनें, समय कब पहुँचेगा या नहीं पहुँचेगा, यह आपके हाथ में कभी था ही नहीं, इसलिए वहाँ डर घर बना ही नहीं सकता, अगर मन उसे पकड़े न रहे। नेपाल के बच्चों की तस्वीर मन में बार बार आना दर्द है, वह ठीक है। पर उसके पीछे जो चलता रहता है, कि सब खत्म होगा, लोग तड़प के मरेंगे, यह अंदाज़ा दर्द नहीं है, यह मन का वह हिस्सा है जो हर अनजानी चीज़ को सबसे बुरी कहानी बना देता है, ताकि उसे कुछ पकड़ने को मिल जाए। जो आपके हाथ में है वह बहुत सीधा है, अपनी जरूरत और अपने "और चाहिए" को देखना, और आचार्य जी की बात को आगे ले जाना, जितना बन पड़े। बाकी कल्पना पर समय मत दीजिए, वह आपसे आज का यह काम छीन लेगी।


















