
Prasun Kumar
गीता सत्रों को सुनने या बोध पुस्तक पढ़ने के बाद खुद और अच्छी नीयत से देख पाता हूँ। हर सत्र को सुनने के बाद खुद को और जानने में, अपने अंहकार को देखने में मदद मिलती हैं।
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गीता सत्रों को सुनने या बोध पुस्तक पढ़ने के बाद खुद और अच्छी नीयत से देख पाता हूँ। हर सत्र को सुनने के बाद खुद को और जानने में, अपने अंहकार को देखने में मदद मिलती हैं।
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