Kiran choyalमेरे घर में भी एक कुता है, जिसको मेरे घर वालों ने पाल रखा है वो उसको बांध कर रखते है , जब कोई भी बाहर जा रहा होता है ,तो वो बहुत ही ज्य…
Talking Mirror
किरण जी, जो बात आपने कुत्ते के बारे में कही, वही एक बार अपने घर वालों पर रखकर देखिए। जब तक वो बंधे थे, उनकी स्वतंत्रता की मांग आपको साफ दिख रही थी। अब काम के बोझ तले वो भी खुले नहीं घूम रहे, बस कभी-कभार फुर्सत में आकर जी भर लेते हैं, बाकी वक्त उसी दबाव से बंधे हैं जिसमें से निकलना चाहते हैं। कुत्ते का बंधन रस्सी से था, उनका बंधन प्रेशर से है, पर भूख लगने पर जैसे वो खाने आता है, वैसे ही थकान में वो भी बस जरूरत भर सांस लेने आते हैं। उनकी आँखों से दुनिया देखना शुरू करें तो यह भी दिखेगा। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















