
Annpurna Shukla
जिस संख्या को हम बढ़ाने में लगे हैं वह मात्र उपभोगवाद का ही पैमाना है।जबकि गुणवत्ता ही ज्यादा मायने रखती है न कि संख्या।
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जिस संख्या को हम बढ़ाने में लगे हैं वह मात्र उपभोगवाद का ही पैमाना है।जबकि गुणवत्ता ही ज्यादा मायने रखती है न कि संख्या।
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