
यदि एक मशीन हमारी भावनात्मक ज़रूरतों को पूरा करने लगे, तो क्या हम वास्तव में अधिक जुड़े हुए हैं, या केवल अपने अकेलेपन को तकनीक से ढँक रहे हैं? ---केवल अपने अकेलेपन को तकनीक से ढँक रहे हैं। यदि जीवन में अध्यात्म है, गुरु हैं, ग्रंथ हैं तो अकेलापन होगा ही नहीं वरन जीवन सुंदर होगा। भविष्य का सबसे बड़ा संकट AI है... या वह "मैं", जो वास्तविकता से संवाद करने के बजाय हमेशा एक आरामदायक उत्तर खरीदना चाहता है? --भविष्य का सबसे बड़ा संकट AI नहीं "मैं" है AI प्रेम, करुणा नहीं जानती। AI को आत्मज्ञान नहीं सिखा सकती। AI के पास बुद्धि है पर हृदय नहीं। - आत्मज्ञान बिना नर भटके, कोई मथुरा कोई काशी। जैसी मृगा नाभि कस्तूरी, वन वन फिरत उदासी।। पहले लोग मथुरा काशी भटकते थे अब AI की भूलभूलईया में भटक नहीं, उलझ रहे हैं जो भटकने से भी ज्यादा बुरा है। "यह संसार काँटन की बाड़ी, उलझ-पुलझ मरि जाना है। यह संसार झाड़ औ झाँखर, आग लगे बरि जाना है। कहत कबीर सुनो भाई साधो, सतगुरु नाम ठिकाना है॥"


















