
RITESH KUMAWAT
अपने "मैं" को, विषय बदलते रहते है, छवियाँ भी समय के साथ बदलती रहती हैं, बच जाता लेकिन हमारा "मैं" ही जो बंधन बनाता रहता हैं, अपनी कहानी आगे बढ़ाता रहता हैं अपनी कल्पनाओं में ही जीता रहता हैं...
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अपने "मैं" को, विषय बदलते रहते है, छवियाँ भी समय के साथ बदलती रहती हैं, बच जाता लेकिन हमारा "मैं" ही जो बंधन बनाता रहता हैं, अपनी कहानी आगे बढ़ाता रहता हैं अपनी कल्पनाओं में ही जीता रहता हैं...
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