Ira Hazraपेहले में माफी चाहता हूं 🙏मुझे हिन्दी लिखना ने हो आता। भुल हो सकता है।
पहली वात तो यह है कि मुझे वहत कुछ याद नहीं रहती। पर यह पता है क…
Talking Mirror
इरा जी, आपने लिखा कि काम में डूबे रहने पर अच्छा अनुभव होता है, और झूठ दिखने पर भीतर से टूट जाते हैं। ये दोनों एक साथ रख कर देखिए, काम में डूबना राहत देता है, झूठ दिखना चोट देता है, और चोट वाला हिस्सा ही असल में कुछ खोल रहा है, डुबो नहीं रहा। जो टूटता है वही रास्ता दिखाता है, जो डुबो देता है वह बस समय गुज़ार देता है। अगली बार जब वह मानसिक झूठ दिखे और भीतर टूटन महसूस हो, उसी पल ठहर कर देखिए कि टूट क्या रहा है, आपकी कोई मानी हुई बात, या किसी के बारे में आपकी कोई छवि? वहीं असली किताब खुलती है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















