
धर्म के नाम पर ना जाने कितनी गलत धारणा हम सब पकड़ के बैठे है, ये सिर्फ अफगानिस्तान की बात नहीं है पूरी दुनियां में जहां लोग किसी पंथ,मजहब,धर्म को आँख बंद करके मान रहे हैं बिना समझे जाने की , धर्म हमे बेहतर बन रहा है या और गलत मान्यताओं को अंदर भर रहा है, धर्म हमे स्वतंत्र कर रहा है या गुलाम बना रहा है। धर्म का उद्देश्य लोगों को सही जीवन देना है ,मुक्ति देना है बेहतर बनाना है यहां कोई भेद नहीं होता तुम महिला हो या पुरुष,यही तो आचार्य जी का मिशन है लोगों तक सही धर्म का अर्थ पहुंचाना , जो तुम सब बने बैठे हो उसे देखो । आचार्य जी की शिक्षाएं ही दुनियां बदल सकती हैं इसके अलावा कोई उपाय मुझे नज़र नही आता अभी तो पुरी दुनियां को बदलने का,क्योंकि आचार्य जी बोलते है इंसान का अंदर से बदलना होगा तभी बाहरी बदलाव आएगा नहीं तो बनाते रहो नियम क़ानून कोई स्थाई बदलाव नहीं मिलेगा । आचार्य जी कहते है न "मेरा दिल बदल दे" यही जरूरी है।


















