
Archana
इस प्रश्न का उत्तर अहंकार को स्वयं का ईमानदारी से मूल्यांकन करके देना चाहिये.. क्योंकि.... 1-- एक तो वो इस सवाल के जबाब के लिए भीतर झाकेंगा तभी उसका सही उत्तर दे पायेगा. 2-- अपने भीतर झाँकना मतलब अपने अँधेरे से परिचित होना, अपनी कामनाओं का दिखना,अपनी मान्यता का टूटना कि हम तो हमेशा अच्छी चीजे ही देखते हैं स्क्रीन पर जो हमारे भ्रमों को तोड़ने में, कुछ नया जानने सीखने में मदद करती है। हमें लगता भले है कि हम जो देख रहे है, खोज रहे है बाहर वो उचित हैं और सही हैं पर शायद यह देखने, जानने से चूक जाते है कि यही अपूर्णता / अंतहीन, नासमझ खोज ही शोषणकारियों का हथियार बन जाती है, हमें और कमजोर और गुलाम बनाने के लिए...


















