
प्रशंसा नाम पहले आता है किसीके लिए कुछ किया जाए और वह बदले मै कृतज्ञता ज्ञापन न करे तो हम कहते है कि क्या फायदा हुआ इस मदद का जब उसने किसके सामने तुम्हारी सहायता की बात करी हीं नहीं ।परिवार मै ऐसा हीं कहता सुना है बड़ों से और बूढ़ों से तो ये आस रहती है कि मैने कुछ किया है तो प्रशंसा मिले । और हम ऐसे व्यक्ति है जो घर परिवार के इलावा बाहर किसका मदद करते हीं नहीं , करते है तो पूरी की पूरी याद रखते है उसे याद दिलाने के लिए कि कभी कुछ किया था मैने । मै एक बात यहां पर और कुछ कहना चाहती हूं मैने जो मेरे घर परिवार मै देखा है । पति ने पैसे कमाए उसने सहायता दी और पत्नी अपनी और से उसकी सम्मान का पात्र बन जाती है और कहीं कहीं बो झगड़े भी करती है नहीं देने के लिए ये मैने अपने परिवार मै मेरे साथ भी और बाकी औरतों को करते हुए देखा है ।


















