Nandani Koshleप्यार नाम पे जिंदगी के 5-6 साल एक व्यक्ति को सबसे ऊपर रखा था मैने, लेकिन उसी व्यक्ति ने जाति गिनाई, अचानक गायब हो गया, धोखा दिया, एक्सी…
नंदानी जी, आपने लिखा, जितना कर सकती थी उतना किया उसके लिए, और इसने क्या कर दिया मेरे साथ। यही हिसाब वो जगह था जहाँ पीड़ा ने पहला इशारा दिया था, मगर सवाल वहीं अटक गया था, उसने इतना क्यों नहीं किया। आचार्य जी ने जो दिखाया वो उससे एक कदम आगे का था, सवाल ये नहीं कि उसने कम किया, सवाल यह कि जिसे आधार बनाया वो नाम ही गलत था। जाति गिनाना, गायब होना, सर्जरी के बाद का वो जवाब, ये अलग अलग घटनाएँ नहीं थीं, एक ही चीज़ के अलग अलग चेहरे थे, और वो चीज़ प्यार नहीं थी, ये आपने खुद देख लिया। ज़मीन खिसकने के उस पल को जितना हो सके उतना साफ़ देखते रहिए, क्योंकि वहीं से असली फ़र्क़ दिखता है, उस व्यक्ति और उस सीख के बीच का। आचार्य जी के सत्रों के साथ बने रहिए, यही वो जगह है जहाँ ये देखना और गहरा होता जाएगा। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















