Reeta Gautam जिस बात को मैं सही मानती हूं उसकी पुष्टि चाहती हूं ।
Talking Mirror
रीता जी, यह जो साफ़ कहा आपने, यहीं से असली काम शुरू होता है। ध्यान दीजिए, पुष्टि चाहने में हर्ज नहीं, पर पूछने लायक यह है कि पुष्टि किसकी तलाश में है, जिस 'मैं' ने धारणा बनाई उसी की सुरक्षा में, या सच में बात को समझने में। अगली बार जब कोई बात आपकी किसी पक्की राय के खिलाफ़ प्रमाण लेकर आए, वहीं देखिएगा, भीतर पहली हलचल क्या होती है, उस आदमी या बात को ठीक से सुनने की, या फौरन जवाब खोजने की कि मैं गलत कैसे हो सकती हूँ। वह हलचल ही बताएगी कि जाँच कहाँ रुक जाती है।


















