
🔎 अपनी ज़िंदगी में छोटी-छोटी चीज़ों को देखिए। कहाँ लड़के और लड़कियों की चीजों के लिए जबरदस्ती अलग-अलग पैमाने बनाए गए हैं और हमने उन्हें अपना भी लिया है? रंग को लेकर भेदभाव- यदि लड़की है तो उसे पिंक कलर के ही कपड़े लेकर दिए जाते हैं । और यदि लड़का है तो उसको ब्लू कलर के कपड़े लेकर दिए जाते है । खिलौने की चॉइस- यदि लड़की है तो उसको गुड़िया दी जाती है और लड़का है तो उसको कार बंदूक यह सब दिया जाता है । भावनाएं व्यक्त करना: लड़कों को बचपन से सिखाया जाता है कि "लड़के रोते नहीं हैं", जिससे वे अपनी भावनाएं छिपाने लगते हैं। लड़कियों को अक्सर 'ज़्यादा संवेदनशील या भावुक' मान लिया जाता है। काम का बँटवारा: घर में पानी की बोतलें भरना, झाड़ू-पोछा या खाना बनाना अक्सर लड़कियों का काम मान लिया जाता है। वहीं, बाज़ार से सामान लाना, बिजली का बिल भरना या गाड़ी साफ करना लड़कों के ज़िम्मे डाल दिया जाता है।


















