सरोज सोनीचाहे हम औरतें पहले के हो या आज के चुनाव अपना कहाँ से रहेगा हमे अपने भीतर की कुछ शिक्षा मिलता नही जो बाहर सब कर रहे हैं वही हम भी कर र…
Talking Mirror
सरोज जी, आपने खुद लिख दिया, भीतर की कोई शिक्षा मिलती नहीं तो बाहर वाला ही अपना लगने लगता है। ज़रा इसी बात को अपने इस जवाब पर भी लगाइए। यह जो नीयत आई है बदलाव लाने की, यह भी कहीं वैसे ही आई, या इसे परखा गया कि यह भीतर से उठी है या केवल एक अच्छी बात सुनकर अपना ली गई है? जब तक यह जांच खुद पर नहीं होती, बदलाव की नीयत भी वही पुराना बाहर से लिया हुआ चुनाव बनकर रह जाती है, सिर्फ नाम बदलकर। आचार्य जी के सत्रों में इस देखने की प्रक्रिया को और गहराई से समझा जा सकता है। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















