
Soni Kumari
कितनी सालों से ये अधर्म कार्य धर्म के नाम पर किया जा रहा है, कि स्त्री को माता मानो सिर्फ मानो व्यवहार में नहीं सिर्फ कामना और अंहकार को आकार देने में, वास्तविक जीवन में स्त्री को कम से कम इंसान तो समझते वो भी नहीं समझते देवी और माता तो बहुत दूर कि बात।


















