Priyanka Kumariham dar me hi jite hai dar ki pahredari karte hai Aacharya ji kahte hai fir bhi unke mutabik nahi ji pa rahe hai hamari aham hamko vais…
प्रियंका जी, आपने लिखा कि अहंकार आपको वैसे जीने नहीं देता जैसे आचार्य जी कहते हैं, और उसी वाक्य में पूछ भी लिया कि अहंकार से कैसे निकलें। गौर कीजिए, यह शिकायत और यह सवाल एक ही अहंकार की दो चालें हैं। शिकायत कह रही है कि रुकावट बाहर कहीं है, मुझसे अलग कोई चीज़ है जो मुझे रोक रही है। जबकि सच यह है कि जो रोक रहा है और जो रुकना चाहता है, दोनों आप ही हैं। जिस दिन आप ईमानदारी से देख लेंगी कि यह बंधन किसी और का नहीं, आपका अपना ही चुनाव है, उसी देखने में पहला हिलना शुरू हो जाता है। रास्ता पूछना बंद करके यह पूछिए कि अभी, इसी क्षण, कौन सा स्वार्थ है जिसे मैं बचाना चाहती हूँ। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















