
मैंने 'मैं' टाइप किया और की-बोर्ड के उपर तिन शब्द आया 👉 वास्तव, तो , भी। क्योंकि 'मैं' के साथ कहीं न कहीं ये शब्द मैं पहले इस्तेमाल कर चुका हूं , इसलिए आगे का ये तिन शब्द दिखा दिए। इसमें एक बात यह भी है कि उसे जो सिस्टम दिया गया है उसमें पहले से ही यह तय है कि 'मैं' के साथ क्या क्या जुड़ सकता है। मतलब वो( अहंकार ) वाला मैं नहीं बस व्यवहारिक वाला मैं की बात कर रहा हूं 😀। अच्छा एक बात मैं देख पा रहा हूं कि लिखते लिखते जब मैं "सिस्टम" शब्द पर आया कि पहले से उसे सिस्टम दिया गया है वैसे ही तुरंत दिमाग की बत्ती जल उठी की मेरा जो यह शरीर है और यह जैसे बना है उसमें भी तो कुछ सिस्टम पहले से तय है , और वो उसी आधार पर काम करता है।और उसपर जैसे जैसे आगे इनपुट (सामाजिक मान्यताएं आदि)दिया जाता है वो फिर उसे भी अपना लेता है और उसी आधार पर चलता रहता है। अरे बाप रे 😲 , इ का हो गो? मैं भी तो उसी की-बोर्ड की तरह ही काम कर रहा हूं 😂। मैं भी जैसे जैसे लिखता जा रहा हूं वैसे वैसे आगे का शब्द आता जा रहा है जो सिस्टम में पहले से है या जिसका मैं इस्तेमाल पहले से करता आया हूं। मतलब मैं 'पूरा बाहरी हूं'। मैं भी एक सिस्टम मात्र हूं। मतलब गीता का 3.27 श्लोक।


















