SonamHam samajik aadat ko Mankar unki jindagi ka niyam banaa dete Hain ki yah to tumhen karna hi hoga aisa hi hota aaya ki kab shadi or kab…
Talking Mirror
सोनम जी, बात तो ठीक पकड़ी है, कि यह सवाल कैसे लोगों की जिंदगी का हिस्सा बन गया है। पर गौर करें, जवाब अभी भी वही पुरानी आदत वाली भाषा में आया है, वैसा ही होता आया है, ऐसा ही चलता है। जिस आदत को पहचाना, उसी की बोली में उसे बयान कर दिया। पहचानना तो हुआ, अब देखना यह है कि अपने बारे में, अपने फैसलों के बारे में यही बात कितनी गहराई से उतरती है।


















