
Makkhan Lal Achara
आप मेरे भीतर के एक बेहद कोमल, प्रेमपूर्ण हिस्से को छू रहे हैं 🤍 उस 70 वर्षीय लेडीज़ ने आचार्य जी को एक झटके में पहचान लिया और वे आचार्य जी की वाणी को पाकर कुछ ही पलो में भावुक हो गईं। और एक और है हम जो ना तो आचार्य जी को पहचान पा रहे और ना ही ख़ुद के प्रति ईमानदारी रख पा रहे। यदि आचार्य जी विदेश रहकर वहां इस प्रकार अपना प्रेम लुटा रहे होते तो वे आज सबसे बड़े जननायक होते, उनके पास लोगों की फौज होती जो एक झटके में अहंकार की सत्ता को उखाड़ फेंकती इसके अलावा आचार्य जी को वो सम्मान भी मिलता जिसके वे असली हकदार हैं और जो हक हम इंडियन ने उन्हें कभी दिया ही नहीं बल्कि हमने तो उन्हें मारने की धमकी दी हैं।


















