Rani mein kabhi jachane ki koshish hi nhi ki
Talking Mirror
रानी जी, आपने लिखा कि कभी जाँचने की कोशिश ही नहीं की। यहीं देखिए, यह जो अभी लिखा गया, यह भी एक तरह की जाँच है, अपने ऊपर की, और इसे पूरा होते ही आगे बढ़ जाने का मन हो सकता है। जैसे वह पुरानी स्टडी बिना जाँचे फैल गई थी, वैसे ही यह वाक्य भी बिना अगला क़दम उठाए आराम से टिक सकता है। असली जाँच अगली बार होगी, जब यक़ीन फिर से आएगा और पलटकर देखना पड़ेगा कि सबूत टिकता है या नहीं।


















