
जी बिल्कुल सही है हम दुनिया को उनकी आँखों से देखे तो, तो हमारी अपनी जीवनशैली पर सवाल उठेगा, और उठना भी चाहिए। हम हमारे स्वाद, और लालच के लिए पशु पक्षी को एक उपभोग की वस्तु मात्र समझ बैठे हैं, जो कि गलत है, क्योंकि पशु पक्षी हमारी तरह ही प्रकृति का हिस्सा है, वे भी जीव है। मै भी कभी इनमेसे थी, मांसाहार करती थी, मगर जबसे आचार्य जी ने पशु हिंसा के बारे में समझाया है, मैने तबसे मांसाहार एकदम बंद कर दिया। और अब कितना भी खाने का मन करता है, आचार्य जी की शिक्षाएं याद आ जाती है, और मै मांसाहार का विचार भी त्याग देती हूँ। मै ये कभी समझ नहीं पाती, कि पशु भी हमारी ही तरह है, वे भी निर्दोष जीव ही है । क्योंकि बचपन से मेरी कंडीशनिंग ही ऐसी थी, न किसी ने कभी इस विषय पर मुझे बताया, मै अज्ञान में ही जी रही थी। पशु पक्षी, हर जीव बस प्रेम के योग्य है न कि उनका भोग करना, और न उनका मांस खाना। धन्यवाद आचार्य जी 🙏 आप ने ही मुझे ये देखने के लिए प्रेरित किया है, नहीं तो मै यूंही अज्ञान में जीती रहती।


















