
Durga Rathod
ji की है कई बार, मगर अब देख पाती हूँ मेरा अहंकार ही था,जो अपनी गलती स्वीकार करने को अपनी हार मानता था, अब सजग रहती हूं बहस में, किसी से बहस बाजी से बचती हूं, शांत रहती हूं।
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ji की है कई बार, मगर अब देख पाती हूँ मेरा अहंकार ही था,जो अपनी गलती स्वीकार करने को अपनी हार मानता था, अब सजग रहती हूं बहस में, किसी से बहस बाजी से बचती हूं, शांत रहती हूं।
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