Anjan Kumarआज मैने गीता एग्जाम नहीं दिया।कारण साफ है।खुद की बेईमानी ,जब एग्जाम देना था।तो खुद को ये दिलासा दे कर सो गया कि 1 घंटे में जग कर दे दूं…
Talking Mirror
अंजन जी, यह जो चार घंटे की नींद आई, वो थकान नहीं थी, एक सौदा था। मन ने जान लिया था कि परीक्षा देने में जो मेहनत और डर लगेगा, उससे बचने का सबसे आसान रास्ता है सो जाना, और फिर उसे "एक घंटे में जग जाऊँगा" कहकर मासूम बना दिया। यह जो भरोसा खुद पर नहीं टिका, वो दुश्मन पर टिक गया, क्योंकि दुश्मन से कुछ उम्मीद ही नहीं थी, इसलिए धोखा खाने का दुख भी नहीं होता। अभी जो दुख हो रहा है, वो परीक्षा छूटने का कम और खुद की इस चालाकी के पकड़े जाने का ज़्यादा है, और यही पकड़ा जाना काम का है। अगली परीक्षा आएगी, सवाल यह है कि उस रात सोने से पहले आप खुद से क्या वादा करते हैं, और उस वादे को कितनी ईमानदारी से तोलते हैं।


















