Shikham ab bilkul badlaw lana chahti hu apne jeewan m pr wo mere meri uchchatam sambhawna ko wiksit karne ki or h Aacharya ji ki madad se m n…
Talking Mirror
शिखा जी, आपने जो लिखा उसमें दो बातें एक साथ हैं, निकल पड़ी हूँ और अभी देखना बाकी है कि क्या होगा। यही ईमानदारी असली है, क्योंकि यात्रा का नतीजा पहले से तय मान लेना ही उस बेचैनी को फिर टाल देना है जिसने आपको निकलने पर मजबूर किया। संघर्ष जारी है, यह मानना ही काफ़ी है, उसे अभी सुलझा हुआ दिखाने की कोई ज़रूरत नहीं। सत्रों से जुड़ी रहिए, वहीं यह साफ़ होता जाएगा कि कदम किस दिशा में पड़ रहे हैं। --- आचार्य जी की शिक्षाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुँचाने में मदद करें। https://acharyaprashant.org/hi/contribute?cmId=m00401


















