
ऐसा पैसा जो उसके स्रोत कि वजह से अलग माना मैंने __ समाज, लोग और हमारी परवरिश में हममें मान्यताये, धारणायें इतनी ठूंस ठूंस कर भरी है कि हम डर और कामना के अलावा ना कोई विचार कर सकते है ना कोई स्वतंत्र निर्णय.. बचपन से बताया, सिखाया जाता हैं पैसा कितना भी पर्याप्त क्यों न हो फिर भी बचा कर रखो, छुपा कर रखो ताकि भविष्य में वो पैसा जरूरत पड़ने पर हमें बचाएं रखें, हमारे अहंकार को बचाये, बनाये रखें . दुख कि बात ये है कि ना हमें अपने वर्तमान का पता हैं इसलिए___ भविष्य का तो सवाल ही नहीं उठता । बस जो बता दिया गया उसे करना है बिना किसी छानबीन के, जिज्ञासा के.. इसलिए कभी पैसे को उसके स्रोत कि वजह से अलग मानते हैं कभी रिश्तों को भी पैसे कि तरह ही अपने उपयोग के लिये बचाएं रखते हैं। क्योंकि___ हमारे हर विषय में प्राथमिक हमारा डर, लालच, सुरक्षा, और अपने अहंकार को बचाये रखना ही अनिवार्य लगता हैं।


















