
1. AP फ्रेमवर्क चेतना को कैसे परिभाषित करता है? अपने शब्दों में लिखिए। Ans-: AP फ्रेमवर्क के अनुसार, चेतना ‘मैं’ (अहंकार) और ‘विषय’ (जिसे मैं जान रहा हूँ) के बीच का द्वैत है। अर्थात् जहाँ कोई ‘जानने वाला’ और कोई ‘जाना जाने वाला’ है, वहाँ चेतना की यह संरचना मौजूद है। 2. तंत्रिका विज्ञान (Neuroscience) चेतना को कैसे परिभाषित करता है और ये AP फ्रेमवर्क से कैसे अलग है? Ans:- तंत्रिका विज्ञान के अनुसार चेतना चेतना (Consciousness) वह अवस्था है जिसमें मस्तिष्क अपने तथा बाहरी संसार से संबंधित सूचनाओं को ग्रहण, संसाधित और उनका अनुभव कर पाता है। उदाहरण: दर्द होने पर केवल तंत्रिका-संकेत उत्पन्न होना पर्याप्त नहीं है; उस दर्द का अनुभव होना चेतना का हिस्सा है। तंत्रिका विज्ञान में चेतना को मुख्यतः दो पहलुओं में समझा जाता है: 1. जागरूकता (Awareness) — अपने और वातावरण के बारे में जानकारी होना। 2. अनुभूति (Experience) — रंग, दर्द, सुख, विचार आदि का व्यक्तिगत अनुभव होना। तंत्रिका विज्ञान और AP फ्रेमवर्क में चेतना का अंतर 1. दृष्टिकोण: तंत्रिका विज्ञान: चेतना को मस्तिष्क और तंत्रिका-तंत्र की प्रक्रियाओं के आधार पर समझता है। AP फ्रेमवर्क: चेतना को ‘मैं’ (अहंकार) और ‘विषय’ के द्वैत के रूप में समझता है। 2. मुख्य प्रश्न: तंत्रिका विज्ञान: चेतना मस्तिष्क में कैसे उत्पन्न या संबंधित है? AP फ्रेमवर्क: चेतना में ‘मैं’ और विषय की भूमिका क्या है? 3. मुख्य तत्व: तंत्रिका विज्ञान: मस्तिष्क, न्यूरॉन्स, तंत्रिका-संकेत और सूचना-प्रसंस्करण। AP फ्रेमवर्क: अहंकार (‘मैं’) + विषय (‘जिसे मैं जान रहा हूँ’)। 4. विशुद्ध चेतना: तंत्रिका विज्ञान: ‘विशुद्ध चेतना’ को स्थापित वैज्ञानिक अवधारणा नहीं मानता; इसके लिए अनुभवजन्य प्रमाण आवश्यक हैं। AP फ्रेमवर्क: ‘मैं’ और विषय के द्वैत से अलग किसी अवशिष्ट विशुद्ध चेतना को नहीं मानता। 5. अहंकार के विगलन पर: तंत्रिका विज्ञान: self-awareness में होने वाले बदलावों को मस्तिष्कीय प्रक्रियाओं के संदर्भ में अध्ययन करता है। AP फ्रेमवर्क: अहंकार के विगलन के साथ अहंकार द्वारा जानी जाने वाली चेतना भी समाप्त हो जाती है। 3. आचार्य जी के अनुसार स्वतंत्र इच्छा (Free Will) क्या है? अपने जीवन से कुछ उदाहरण दीजिए जहाँ आपको लगता आप स्वतंत्र इच्छा का पालन करते हैं, क्या वाकई स्वंतंत्र होतीं हैं। मैंने अभी तक Free will को नहीं पढ़ा है। सत्रों में सिर्फ सुना हूँ कि जिसे आम तौर पर हम फ्री विल कहते हैं वह भी बस शरीर, समाज और संयोग पर आश्रित होती है। मुझे अपने जीवन से ऐसा उदाहरण देना मुश्किल हो रहा है, शायद नहीं होती है ; Free will. 4. कल के बोध प्रत्युषा सत्र में आचार्य जी ने कहा कि अहंकार भी नहीं, बल्कि ‘दुख’ मौलिक होता है। आप इससे क्या समझे? संक्षिप्त में लिखिए। Ans: - धर्म का प्राथमिक संबंध दुःख से है, अहं से नहीं। चूँकि जब तक अहं है दुःख भी रहेगा। इसलिए अहं के विगलन पर जोर दिया जाता है।


















