
नमस्ते आचार्य जी हमें परिवार समाज और रिश्तेदारों द्वारा यही सिखाया, समझाया और दिखाया गया है कि शिक्षा मतलब एक उंचा पद, अधिक से अधिक डिग्री अधिक पैसे वाला नौकरी स्कूल कि क्या जरूरत, व्यवस्था है उस पर किसी कि नजर नहीं जाती हम अपने जिम्मेदारी से बचने के लिए सरकार को दोषी ठहराते हैं हां ये बात सही है कि उसको वोट देते हैं तो जिम्मेदारी भी सबसे ज्यादा उसी का होता है पर हम वोट भी तो किस चीज पर देते हैं और हमारी मांगे क्या होती है और चंद पैसों और चीजों के लिए बिक जाते हैं तो बिकी हुई चीज कि क्या किमत रानी यानी गुलामों कि क्या जरूरत और इज्जत होती है वो भली भांति परिचित हैं हम जैसे होते हैं वैसे ही सरकारें,या और भी चीजें चुनते हैं अहंकार हमेशा अपनी बचाव के लिए दुसरे को दोषी मानता आया है धन्यवाद


















