Sumitra Mahato ❓ आपके जीवन में कौन-सी सीमाएँ सचमुच परिस्थितियों ने तय की हैं, और कौन-सी सीमाएँ आपने अपने बारे में बनी किसी धारणा के कारण स्वीकार कर ली…
सुमित्रा जी, आख़िरी पंक्ति आपने खुद लिख दी है, बहाने बनाती फिरती हूँ। उससे ठीक ऊपर जो बहाना है, जॉब मिलेगी तब कोचिंग लूँगी, उसमें सीखना एक तारीख़ के पीछे रख दिया गया है, और वह तारीख़ आपके हाथ में है ही नहीं। जो चीज़ कभी आपके हाथ में थी, यूट्यूब खोलना और आज शुरू करना, उसे आपने पहले ही असंभव घोषित कर रखा है। इसी से बाक़ी सारे वाक्य, मुझसे नहीं होगा, मैं हिंदी मीडियम की हूँ, एक साथ खड़े हो पाते हैं, क्योंकि जब शुरू करना ही बंद है तो उनकी परीक्षा कभी होती ही नहीं। हिंदी मीडियम तो बस एक तथ्य है। उसे अंग्रेज़ी न सीखने की वजह आपने बनाया है। अगर आचार्य जी को सुनते हुए, सत्रों और रिकॉर्डिंग्स में जो आज और अभी उपलब्ध है, सीखना आज ही शुरू कर दें, तो यह जो असंभव का फ़ैसला है, इसका पहला इम्तिहान आज ही हो जाएगा। और हाँ, आपने अगले महीने के लिए अभी तक एनरोल नहीं किया है। अभी एनरोल कर लें। https://acharyaprashant.org/hi/applications/re-enrolment?cmId=m00401


















