
👉मेने अपने जीवन मे देखा है, मे ज़ब भी किसीको देखती हूँ, तो यही सब अहंकारीक पहचना के साथ क्युकी पहले की मान्यता जों हमें बताई गयी, की लड़की की इज्जत उसके उसी (वजाइनल) हिसे मे है, तब मेने भी शरीर को बड़ी बात माना और इसे हमेसा सुरक्षित रखने का फैसला किया, और किसीसे भी नही ज्यादा मिलती जुलती थीं,क्युकी मुझे वही डर मेरे अंदर था, की इज्जत जों मेरे शरीर को बड़ा बना रहीं थीं। मे पता नही कहा थीं, हूँ क्युकी जैसे मुजे बताया गया, वैसे ही उसी नजर से दूसरी लड़कियों को देखती थीं, और अब भी देखती हूँ, पर अब मुझे समझ आ रहा है, की ये सब हमारे अहंकार की चाल है। जों एक अहंकार दूसरे अहंकार पर किस तरह की शर्ते लगता है। अपने आप को विशिष्ट बनाय रखने और विशिष्ट दिखाने के लिए। और अब मुझे पता चला की वो किस तरह अपने आप को किसी कहानी मान्यता और स्वामित्व और मेरी इच्छा के अनुसार हमें पकड़े हुए है। जिसका परिणाम डर है। जों अपने आप को बचने की कोशिस मे कैसे किसी विषय की और भेज देता है। उसकी सच्चाई जानने को,और अपने आप को बचाय रखने को (अनदेखा )।


















