
1️⃣ जहाँ कई विकसित देशों में महिलाओं की खेल उपलब्धियाँ राष्ट्रीय सफलता का बड़ा आधार हैं, वहीं भारत में अक्सर लड़कियों को खेलों से हतोत्साहित किया जाता है और उनके पहनावे या शरीर तक चर्चा सीमित रह जाती है। इसके पीछे कौन-सी गहरी मान्यताएँ काम करती हैं? हाल के समय से कुछ उदाहरण देकर बताइये की कैसे लोकधर्म इसमें एक बड़ी भूमिका निभाता है। लोकधर्म यानी समाज की बनी-बनाई मान्यताएँ इसमें बड़ी भूमिका निभाती हैं। आज भी बहुत से लोग मानते हैं कि लड़की का मुख्य काम घर संभालना है, खेलना नहीं। इसलिए उसकी मेहनत और उपलब्धियों से ज़्यादा उसके कपड़ों, शरीर या व्यवहार पर ध्यान दिया जाता है। हाल के वर्षों में कई महिला खिलाड़ियों को सोशल मीडिया पर उनके प्रदर्शन से ज़्यादा उनके पहनावे और निजी जीवन को लेकर आलोचना झेलनी पड़ी। कई परिवार आज भी बेटियों को खेल में करियर बनाने से रोक देते हैं, क्योंकि उन्हें समाज की बातें और "इज़्ज़त" की चिंता रहती है। यही लोकधर्म है- जहाँ समाज की पुरानी धारणाएँ प्रतिभा और मेहनत से बड़ी हो जाती हैं। जब तक इन मान्यताओं को नहीं बदला जाएगा, तब तक लड़कियों को खेलों में बराबरी का अवसर और सम्मान मिलना कठिन रहेगा। 2️⃣ आचार्य जी शरीर को अहंकार की पहली कॉलोनी क्यों कहते हैं? आचार्य जी🙏 शरीर को अहंकार की पहली कॉलोनी इसलिए कहते हैं क्योंकि अहंकार सबसे पहले खुद को शरीर मान लेता है। यहीं से "मैं" और "मेरा" की भावना शुरू होती है। * जैसे ही हम सोचते हैं "मैं यही शरीर हूँ", अहंकार जन्म ले लेता है। * फिर शरीर से जुड़ी हर चीज़- रूप, रंग, उम्र, जाति, लिंग, ताकत, सुंदरता- हमारी पहचान बन जाती है। * इसके बाद अहंकार और भी "कॉलोनियाँ" बसाता है, जैसे मेरा परिवार, मेरा धर्म, मेरी जाति, मेरा देश, मेरी नौकरी, मेरी संपत्ति, मेरी उपलब्धियाँ। * इन सबका आधार वही पहली पहचान है- शरीर से जुड़ाव। शरीर अहंकार की पहली कॉलोनी है, क्योंकि यहीं से झूठी पहचान का पूरा संसार खड़ा होता है। जब यह समझ आ जाती है कि मैं केवल शरीर नहीं हूँ, तब अहंकार की जड़ कमजोर होने लगती है। 3️⃣ क्या आप जिन जगहों पर काम करते हैं या पढ़ते हैं, वे आपको खेल के लिए प्रोत्साहित करती हैं? अगर आप कोई खेल खेलते हैं, तो अपनी फ़ोटो या वीडियो कम्युनिटी पर ज़रूर साझा करें। मेरे पापा एयर फोर्स में थे, तो हम पांच भाई बहन है - दो भाई और तीन बहने। हमें पांचों को ही छोटे से स्पोर्ट्स के लिए प्रोत्साहित करते थे पापा मम्मी। स्कूल में Taekwondo 🥋 (मार्शल आर्ट्स), बास्केटबॉल, मैराथन(10km, 21km और 6hr स्टेडियम रन जिसमें 40km किया)। अब वेट ट्रेनिंग मॉर्निंग में कर रही हूँ, क्योंकि अब 48 की आयु में ज्यादा जरूरी है, और इवनिंग में 5km वॉकिंग करती हूँ। अभी आसपास बास्केट बॉल कोर्ट नहीं है वरना जहाँ भी होता है खेलती जरूर हूँ।


















