
Dipti Sharma
अगर खुद के बारे में कहूं तो मेरी छवि सामान्य लड़कियों की छवि जैसी नहीं थी। मैं खेलती,लड़ती,जी हुजूरी नहीं करना,आसानी से कोई बात नहीं मानना तो मैं अच्छी लड़की,सयानी नहीं थी घर वालों की नजर में। लेकिन मैं १०वी में फैल होते ही बिल्कुल बदल गायकिसी से बात न करना,अकेले रहना,कोई जिद न करना शायद ये मेरी शर्मिंदगी थी फेल होने के कारण। तब मैं सुधरी हो गई घर वालों की नजर में। फिर शादी चुपचाप जो हो रहा है करो,करते रहो तो अच्छी बहु। फिर मैं बदली गलत को गलत कहने लगी,खुद के लिए सही काम तलाशने लगी,न कहने लगी और अब मैं हूँ लड़ाकू बहु,पोते को बिगड़ने वाली और पति को सुख न देने वाली। कितने नाम जुड़े है अलग अलग स्थिति में।


















